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Thomas Cup: डेनमार्क, मलेशिया और इंडोनेशिया की बादशाहत खत्म, 10 प्वाइंट में जानें कैसे शीर्ष पर पहुंचा भारत

सार

भारत ने 73 साल के थॉमस कप बैडमिंटन टूर्नामेंट के इतिहास में पहली बार खिताब जीता। फाइनल में टीम इंडिया ने 14 बार की चैंपियन इंडोनेशिया की टीम को 3-0 से हराया।

भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम ने इतिहास रच दिया है। भारत ने 73 साल के थॉमस कप बैडमिंटन टूर्नामेंट के इतिहास में पहली बार खिताब जीता। फाइनल में टीम इंडिया ने 14 बार की चैंपियन इंडोनेशिया की टीम को 3-0 से हराया। इस जीत ने न केवल बैडमिंटन की बादशाहत कायम की, बल्कि यह भी जताया कि अब इस खेल पर से डेनमार्क, मलेशिया, इंडोनेशिया और चीन की बादशाहत खत्म हो चुकी है। 

भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में तभी इतिहास रच दिया था, जब टीम ने क्वार्टरफाइनल में मलेशिया को 3-2 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। 43 साल में पहली बार भारत इस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में पहुंचा था। इससे पहले टीम 1952, 1955 और 1979 में सेमीफाइनल में पहुंची थी। 

सेमीफाइनल में टीम इंडिया ने डेनमार्क को 3-2 से हराकर 73 साल के टूर्नामेंट के इतिहास में पहली बार फाइनल में जगह बनाई और अपने पहले ही फाइनल में टूर्नामेंट भी जीत लिया। भारत का यह थॉमस कप में पहला स्वर्ण पदक है। थॉमस कप में किसी भी तरह का यह भारत का पहला पदक है। भारत छठी टीम है, जिसने यह टूर्नामेंट जीता है।

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स्वर्ण पदक के साथ भारतीय टीम
1. थॉमस कप के इतिहास की बात करें तो इंडोनेशिया ने सबसे ज्यादा 14 बार, चीन ने 10 बार, मलेशिया ने पांच बार और जापान, डेनमार्क ने एक-एक बार यह खिताब जीता है। सेमीफाइनल में डेनमार्क के खिलाफ जीत का जश्न देखकर ही पता लग गया था कि भारत के लिए फाइनल कितना महत्वपूर्ण है। भारत ने शीर्ष पर पहुंचने के लिए इन सभी चैंपियन टीमों को हराया।

2. भारत के स्टार पुरुष खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत, लक्ष्य सेन और एसएस प्रणय ने टूर्नामेंट में जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई और भारत को चैंपियन बनाया। इसके अलावा सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की पुरुष डबल्स जोड़ी ने भी प्रभावी प्रदर्शन किया और जब भी टीम इंडिया मुश्किल में पड़ी इन दोनों ने जीत दिलाई और टीम इंडिया का हौसला बढ़ाया।

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3. मलेशिया और डेनमार्क के खिलाफ लक्ष्य पहला मैच हार गए थे। इसके बाद सात्विक और चिराग की जोड़ी ही थी, जिसने भारत की वापसी कराई थी। फिर किदांबी श्रीकांत और प्रणय ने अपने दमदार खेल से विपक्षी टीमों को चित कर दिया। यानी टीम इंडिया ने एक की भरपाई करने के लिए कई चैंपियन तैयार कर रखे थे। पहली बार भारतीय खिलाड़ी एक टीम के तौर पर खेले।
भारत को ग्रुप सी में रखा गया था, जिसमें चीनी ताइपे, जर्मनी और कनाडा की टीम भी शामिल थी। भारत ने टूर्नामेंट के लिए एक मजबूत टीम भेजी थी। इसमें विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता लक्ष्य सेन, विश्व चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता किदांबी श्रीकांत, एचएस प्रणय और प्रियांशु रजावत को सिंगल्स मैचों के लिए भेजा गया। वहीं, डबल्स में सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी, एमआर अर्जुन और ध्रुव कपिला और कृष्णा प्रसाद और विष्णुवर्धन गौड़ की जोड़ी को टूर्नामेंट में भेजा गया था।

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भारत ने अपने पहले ग्रुप मुकाबले में जर्मनी को 5-0 से हराया था। लक्ष्य सेन ने मैक्स वीस्किर्चेन पर 21-16, 21-13 से आसान जीत के साथ शुरुआत की। सात्विक और चिराग की युगल जोड़ी को जोंस राल्फी जेनसेन और मार्विन सेडेल ने परेशान किया, लेकिन भारतीय जोड़ी ने 21-15, 10-21, 21-13 से जीत हासिल की।

दुनिया के 11वें नंबर के खिलाड़ी श्रीकांत ने काई शेफर को 18-21, 21-9, 21-11 से शिकस्त दी। अर्जुन और ध्रुव कपिला ने बर्जने गीस और जान कॉलिन वोएलकर को 25-23, 21-15 से हराया, जबकि दुनिया के 23वें नंबर के प्रणय ने मैथियास किक्लिट्ज पर 21-9, 21-9 से जीत दर्ज की।

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भारतीय टीम ने ग्रुप राउंड के दूसरे मुकाबले में कनाडा को हराकर नॉकआउट राउंड में अपनी जगह पक्की कर ली। इस मुकाबले के लिए लक्ष्य सेन को आराम दिया गया था। श्रीकांत ने पहले मैच में ब्रायन यांग को 20-22, 21-11, 21-15 से हराया। सात्विक और चिराग की युगल जोड़ी ने जेसन एंथोनी हो-शू और केविन ली को 21-12, 21-22 से हराया।

एचएस प्रणय ने बीआर संकीरथ को 21-15, 21-12 से हराकर टाई जीती। कृष्ण प्रसाद और विष्णुवर्धन की जोड़ी ने डोंग एडम और नाइल याकुरा को 21-15, 21-11 से हराया। वहीं, प्रियांशु रजावत ने विक्टर लाल के खिलाफ आखिरी मैच 21-13, 20-22, 21-14 से जीता।
चीनी ताइपे से हारकर भारत ग्रुप चरण में शीर्ष स्थान पाने से चूक गया। लक्ष्य सेन पहले मैच में दुनिया के चौथे नंबर के चाउ टीएन चेन से 21-19, 13-21, 21-17 से हार गए। सात्विक और चिराग को ली यांग और ची-लिन वांग की दुनिया की तीसरे नंबर की जोड़ी से 21-11, 21-19 से हार का सामना करना पड़ा।

श्रीकांत ने त्जू वेई वांग को 21-19, 21-16 से हराया, लेकिन अर्जुन और ध्रुव कपिला को लू चिंग याओ और पो हान यांग के हाथों 21-17, 19-21, 21-19 से हार का सामना करना पड़ा। प्रणय ने लू चिया हंग के खिलाफ 21-18, 17-21, 21-18 जीत दर्ज की, लेकिन यह मैच जीतने के लिए काफी नहीं था। टीम इंडिया 3-2 से पीछे रह गई।
क्वार्टर फाइनल में भारत के सामने मजबूत मलेशिया की टीम थी। लक्ष्य सेन दुनिया के छठे नंबर के खिलाड़ी ली जी जिया से 23-21, 21-9 से हार गए। वहीं, सात्विकसाईराज और चिराग ने गोह से फी और नूर इजुद्दीन पर 21-19, 21-15 से जीत दर्ज की और भारत को 1-1 की बराबरी पर ला दिया। श्रीकांत ने एनजी त्जे योंग पर 21-11, 21-17 से जीत के साथ भारत को 2-1 से आगे कर दिया।

कृष्णा प्रसाद और विष्णुवर्धन की जोड़ी को हारून चिया और टीओ ई यी से 19-21, 17-21 से हार का सामना करना पड़ा और स्कोर 2-2 से बराबर हो गया। आखिरी मैच में प्रणय ने लियोंग जून हाओ पर 21-13, 21-8 से ऐतिहासिक जीत दर्ज की और टीम इंडिया को सेमीफाइनल में जगह दिलाई।
सेमीफाइनल में भारत ने डेनमार्क पर 3-2 से जीत दर्ज की।  पहले मैच में विश्व नंबर एक विक्टर एक्सेलसन ने लक्ष्य सेन पर 21-13, 21-13 से जीत दर्ज की और डेनमार्क को 1-0 की बढ़त दिलाई। इसके बाद सात्विक और चिराग ने तीन गेम के कड़े मुकाबले में एस्ट्रुप और क्रिश्चियनसेन को 21-18, 21-23, 22-20 से हरा दिया। वहीं, श्रीकांत ने विश्व नंबर तीन एंडर्स एंटोनसेन पर 21-18, 12-21, 21-15 से जीत दर्ज की। ।

कृष्णा प्रसाद और विष्णुवर्धन को हालांकि एंडर्स स्कारुप रासमुसेन और फ्रेडरिक सोगार्ड के हाथों 14-21, 13-21 से हार का सामना करना पड़ा। इस तरह स्कोर 2-2 से बराबर हो गया।  निर्णायक मुकाबले में एचएस प्रणय और उनसे रैंक में बेहतर रासमस गेम्के के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली।

भारतीय खिलाड़ी ने पहला गेम 13-21 से गंवा दिया। पहले गेम में ही प्रणय को टखने में चोट लगी। इसके बावजूद वह मैच खेलते रहे और अगले दो गेम में जीत हासिल की। प्रणय ने गेम्के को 21-9, 21-12 से हराया और भारत को पहली बार फाइनल में पहुंचाया। 
फाइनल में भारतीय टीम की टक्कर टूर्नामेंट की सबसे मजबूत टीम इंडोनेशिया से थी। लक्ष्य सेन ने पहले मैच में डिफेंडिंग चैंपियन इंडोनेशिया के एंतोनी सिनिसुका को 8-21, 21-17, 21-16 से शिकस्त दी। दूसरे मैच में सात्विक और चिराग की जोड़ी ने भी 18-21, 23-21, 21-19 से जीत हासिल की। तीसरे मैच में श्रीकांत ने क्रिस्टी को 21-15, 23-21 से हराकर इतिहास रच दिया।

विस्तार

भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम ने इतिहास रच दिया है। भारत ने 73 साल के थॉमस कप बैडमिंटन टूर्नामेंट के इतिहास में पहली बार खिताब जीता। फाइनल में टीम इंडिया ने 14 बार की चैंपियन इंडोनेशिया की टीम को 3-0 से हराया। इस जीत ने न केवल बैडमिंटन की बादशाहत कायम की, बल्कि यह भी जताया कि अब इस खेल पर से डेनमार्क, मलेशिया, इंडोनेशिया और चीन की बादशाहत खत्म हो चुकी है। 

भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में तभी इतिहास रच दिया था, जब टीम ने क्वार्टरफाइनल में मलेशिया को 3-2 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। 43 साल में पहली बार भारत इस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में पहुंचा था। इससे पहले टीम 1952, 1955 और 1979 में सेमीफाइनल में पहुंची थी। 

सेमीफाइनल में टीम इंडिया ने डेनमार्क को 3-2 से हराकर 73 साल के टूर्नामेंट के इतिहास में पहली बार फाइनल में जगह बनाई और अपने पहले ही फाइनल में टूर्नामेंट भी जीत लिया। भारत का यह थॉमस कप में पहला स्वर्ण पदक है। थॉमस कप में किसी भी तरह का यह भारत का पहला पदक है। भारत छठी टीम है, जिसने यह टूर्नामेंट जीता है।

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स्वर्ण पदक के साथ भारतीय टीम

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