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वर्षों पुरानी बिजली संकट की इस कहानी का हल आखिर क्यों नहीं निकाल पा रही है मोदी सरकार?

नई दिल्ली. देश में कोयले की कमी (Shortage of Coal) की वजह से बिजली संकट (Power Crisis) गहराता ही जा रहा है. 14 से अधिक राज्यों के लोग बिजली संकट से त्राहिमाम कर रहे हैं. केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकारें भी बिजली संकट को लेकर चिंतित नजर आ रही हैं. पावर कट से परेशान लोग अब सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं. इधर, सोमवार को देश के गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) बिजली संकट के मौजूदा हालात को लेकर संबंधित विभागों के मंत्रियों के साथ बैठक की है. इस बैठक में ऊर्जा मंत्री आरके सिंह, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भाग लिया. बिजली संकट को रोकने के लिए बिजली, कोयला और रेल मंत्रालय की सक्रियता चरम पर है. इधर कुछ दिनों से बिजली संयत्रों को कोयला आपूर्ति सुचारु करने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड ने उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ रेल मंत्रालय के साथ मिलकर काम भी कर रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि हर साल मई-जून महीने में ही क्यों कोयला संकट गहराता है? आखिर पांच बरस पुरानी बिजली संकट का अंत कब होगा?

देशभर में तेज गर्मी के बीच पिछले सप्ताह में बिजली की आपूर्ति तीन बार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची. व्यस्त समय में अधिकतम पूरी गई बिजली की मांग मंगलवार को रिकॉर्ड 201.65 गीगावॉट पर पहुंच गई. यह सात जुलाई, 2021 को 200.53 गीगावॉट थी. बृहस्पतिवार को बिजली की अधिकतम मांग 204.65 गीगावॉट के रिकॉर्ड स्तर पर थी और शुक्रवार को यह 207.11 गीगावॉट के सर्वकालिक उच्च को छू गई। बुधवार को यह 200.65 गीगावॉट थी.

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देशभर में तेज गर्मी के बीच पिछले सप्ताह में बिजली की आपूर्ति तीन बार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची.

पांच बरस पुरानी है भारत में बिजली संकट की कहानी
देश के कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने बिजली संकट को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि भारत में बिजली की स्थिति बेहद गंभीर है. हम सबको मिलकर जल्द इसका समाधान निकालना होगा. अभी तक दिल्ली में हम लोग किसी तरह से मैनेज किए हुए हैं. इस समस्या से निपटने के लिए त्वरित ठोस कदम उठाने की जरूरत है.’

क्या कहते हैं जानकार
जानकार मान रहे हैं कि पूरे देश में कोयले की बहुत भयंकर कमी है. इसका सबसे बड़ा कारण रेलवे के रैक का कम होना और कोयले की सप्लाई में भारी कमी है. कोयले की इस भारी कमी के कारण देशभर के सभी पावर प्लांट्स में बिजली उत्पादन को लेकर समस्या आ रही है. क्योंकि, बिजली को स्टोर नहीं किया जा सकता है, बिजली रोजाना पावर प्लांट में बनाई जाती है. इसलिए बिजली के बैकअप के लिए इसे बनाने वाले ईंधन का बैकअप रखना जरूरी है. इस समय यह ईंधन कोयला है, जिसकी सप्लाई में देशभर में कमी आई हुई है.

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कोयले की सप्लाई करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होती है.

सीसीएल किसको जिम्मेदार मानती है
सीसीएल के एक अधिकारी न्यूज 18 हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘कोयले की सप्लाई करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होती है. जहां, पहले ट्रेन में 450 रैक होते थे अब केवल 405 ही हैं. जबकि, इनकी संख्या में बढ़ोतरी होनी चाहिए थी, परंतु इसका ठीक उलट हो रहा है. अब ये रैक घट गए हैं.

कितने प्रतिशत बिजली का डिमांड बढ़ा
वर्ष 2017-18 के बाद से ही देश में बिजली संकट कुछ महीने के लिए गहरा जाती है. जानकार बताते हैं कि इस दौरान पीक आवर डिमांड में 24 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. पीक आवर डिमांड इस अवधि में 1.64 लाख मेगावाट से बढ़कर दो लाख मेगावाट हो चुका है, लेकिन इस दौरान देश में बिजली का उत्पादन 1308 अरब यूनिट से बढ़कर सिर्फ 1320 अरब यूनिट हुआ है.

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हरियाणा में गर्मी और बिजली कटों से जनता बेहाल.

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देश में इस समय 60 हजार मेगावाट क्षमता के बिजली प्लांट कोयला, गैस या दूसरी वजहों से बंद पड़े हैं. 18 हजार मेगावाट क्षमता गैस आधारित बिजली प्लांट गैस उपलब्ध नहीं होने से बंद हैं. दूसरी तरफ आयातित कोयला पर निर्भर 16 हजार मेगावाट क्षमता भी ठीक ढंग से काम नहीं कर रहे हैं. इसी तरह 15-16 हजार मेगावाट क्षमता के संयत्र मरम्मत नहीं होने से बंद हैं तो 10 हजार मेगावाट बिजली संयत्रों के पास पावर परचेज एग्रीमेंट नहीं होने से काम नहीं कर रहे हैं.

Tags: Coal Shortage, Electricity, Home Minister Amit Shah, Power Crisis, RK Singh

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