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पाम ऑयल के निर्यात पर प्रतिबंध: इंडोनेशिया के फैसले से आखिर क्यों बढ़ गई भारत की चिंता?

नई दिल्ली. भारत दुनिया में खाद्य तेल का सबसे बड़ा आयातक देश है. वहीं इंडोनेशिया पाम ऑयल का सबसे बड़ा निर्यातक है. 28 अप्रैल से यहां की सरकार पाम ऑयल के निर्यात पर बैन लगाने जा रही है. ऐसे में भारत की चिंता बढ़ गई है. दूसरी तरफ यूक्रेन पर रूसी हमले की वजह से दुनिया के खाद्य भंडार में कमी आई है और भारत इस साल 10-15 मिलियन टन गेहूं निर्यात करने की उम्मीद कर रहा है. कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह कहा था कि अगर विश्व व्यापार संगठन से अनुमति मिलती है तो वह अगले ही दिन से जरूरतमंद देशों को खाद्य भंडार की आपूर्ति कर सकता है. वहीं अब इंडोनेशिया द्वारा पाम ऑयल के निर्यात पर बैन लगाने की वजह से परिस्थिति में बदलाव आ सकता है.

सवाल है कि एक औसत भारतीय परिवार के बजट में खाद्य तेल की अहमियत कितनी है? HT की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाम ऑयल के निर्यात पर प्रतिबंध लगने से देश के एक आम परिवार का बजट बिगड़ सकता है. भारत अपने कुल आयात का 70% पाम ऑयल इंडोनीशिया से खरीदता है. वहीं 30% मलेशिया से खरीदता है. मौजूदा वक्त में भारत करीब 90 लाख टन पाम तेल का आयात करता है. 2020-21 में भारत ने 83.1 लाख टन पाम तेल आयात किया था. विशेषज्ञों का कहना है कि अब इंडोनेशिया के इस कदम के बाद भारत में पाम तेल का आयात बुरी तरह प्रभावित होगा. ऐसे में आने वाले दिनों में देश में खाने के तेल का भाव और बढ़ने की आशंका है. इसका सीधा असर महंगाई की मार से त्रस्त आम जनता पर पड़ेगा.

पाम ऑयल, कैसे बना खाद्य तेल अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण खिलाड़ी?

बता दें कि पाम ऑयल ताड़ के पेड़ में होने वाले फलों से निकाला जाता है, जिसका इस्तेमाल खाद्य तेल के तौर होता है. साथ ही पाम ऑयल का प्रयोग देश में केक, चॉकलेट, कॉस्मेटिक, साबुन और शैंपू जैसी कई चीजों में किया जाता है. इस बात से यह समझा जा सकता है कि पाम ऑयल की भारतीय अर्थव्यवस्था में कितनी अहमियत है. खपत व्यय सर्वेक्षण (सीईएस) के आंकड़ों के अनुसार, पाम ऑयल का इस्तेमाल सीधे तौर पर खाद्य तेल की जगह अप्रत्यक्ष रूप से अधिक होता है. इसी वजह से पाम तेल देश की खाद्य तेल अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन गया है.

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तेल प्रभाग की वेबसाइट पर दिए गए आंकड़े इस बात की तरफ इशारा भी करते हैं. भारत के कुल खाद्य तेल बाजार में कच्चे तेल, रिफाइंड तेल और वनस्पति की हिस्सेदारी क्रमशः 35%, 60% और 5% है. खाद्य तेलों की घरेलू मांग का लगभग 56% आयात के माध्यम से पूरा किया जाता है, जिसमें से पाम तेल/पामोलिन लगभग 54% है. रिफाइंड पामोलिन (आरबीडी पामोलिन) की खपत के साथ-साथ अन्य तेलों के साथ इसके सम्मिश्रण में पिछले कुछ वर्षों में काफी वृद्धि हुई है और इसका बड़े पैमाने पर होटल, रेस्तरां और खाद्य उत्पादों की विस्तृत किस्मों की तैयारी में उपयोग किया जाता है.

क्या पाम ऑयल पर निर्भरता खत्म की जा सकती है?

खाद्य तेल घरेलू बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसलिए खुदरा मुद्रास्फीति, भारतीयों द्वारा उपभोग किए जाने वाले तेलों के प्रकार में एक बड़ी विविधता है. एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि देश में दालों की तुलना में खाद्य तेल की खपत अधिक होती है. पिछले दस सालों में समाज के गरीब वर्गों में खाद्य तेल की हिस्सेदारी 10 फीसदी तक बढ़ी है.

क्या कहता है सीईएस के आंकड़े

2011-12 के खपत व्यय सर्वेक्षण (सीईएस) के आंकड़ों के अनुसार केरल में खाद्य तेल पर होने वाले खर्च का 80% से अधिक नारियल तेल में जाता है. इसी तरह, बिहार, पश्चिम बंगाल जैसे पूर्वी राज्यों में सरसों के तेल पर बड़ा खर्च देखा जाता है, जो देश के किसी अन्य हिस्से में नहीं है. किसी भी नीति के लिए इन क्षेत्रीय विभेदों को ध्यान में रखने की जरूरत है, जो आयातित खाद्य तेल पर हमारी निर्भरता को कम करने में मददगार साबित हो सकती है.

Tags: Indian economy, Indonesia, Palm oil

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